करुण रस की परिभाषा और करुण रस का 7 उदाहरण

प्रिय पाठक! स्वागत है आपका the eNotes के एक नए आर्टिकल में, इस आर्टिकल में हम करुण रस के बारे में पढेंगे, साथ ही हम करुण रस की परिभाषा और करुण रस के उदाहरण भी देखेंगे। तो चलिए विस्तार से जानते हैं, Karun Ras किसे कहते हैं-

करुण रस (Karun Ras)

करुण शब्द का प्रयोग सहानुभूति एवं दया मिश्रित दुःख के भाव को प्रकट करने के लिये किया जाता है, अतः जब स्थायी भाव शोक विभाव अनुभव एवं संचारी भाव के सहयोग से अभिव्यक्त होकर आस्वाद रूप धारण करता है तब इसकी परिणीति करुण रस कहलाती है। करुण रस का स्थायी भाव शोक है।

करुण रस की परिभाषा
करुण रस की परिभाषा

करुण रस की परिभाषा

प्रिय व्यक्ति या मनचाही वस्तु के नष्ट होने या उसका कोई अनिष्ट होने पर हृदय शोक से भर जाए, तब ‘करुण रस’ की निष्पत्ति होती है। इसमें विभाव, अनुभाव व संचारी भावों के संयोग से शोक स्थायी भाव का संचार होता है।

अगर कोई आपसे करुण रस की परिभाषा पूछे तो यह भी बता सकते हैं-

“जब किसी प्रिय व्यक्ति या मनचाही वस्तु के नष्ट होने या उसका कोई अनिष्ट होने पर हृदय शोक से भर जाए, तब ‘करुण रस’ जाग्रत होता है। इसमें विभाव, अनुभाव व संचारी भावों के मेल से स्थायी भाव शोक का जन्म होता है।”

करुण रस के अवयव

  • स्थाई भाव- शोक
  • आलंबन (विभाव) – विनष्ट व्यक्ति अथवा वस्तु
  • उद्दीपन (विभाव) – आलम्बन का दाहकर्म, इष्ट के गुण तथा उससे सम्बंधित वस्तुए एवं इष्ट के चित्र का वर्णन
  • अनुभाव- भूमि पर गिरना, नि: श्वास, छाती पीटना, रुदन, प्रलाप, मूर्च्छा, दैवनिंदा, कम्प आदि
  • संचारी भाव- निर्वेद, मोह, अपस्मार, व्याधि, ग्लानि, स्मृति, श्रम, विषाद, जड़ता, दैन्य, उन्माद आदि

करुण रस का उदाहरण

करुण रस का उदाहरण

उदाहरण 1-
” अभी तो मुकुट बँधा था माथ, हुए कल ही हल्दी के हाथ।
खुले भी न थे लाज के बोल, खिले थे चुम्बन शून्य कपोल॥
हाय रुक गया यहीं संसार, बना सिन्दूर अनल अंगार।
वातहत लतिका यह सुकुमार, पड़ी है छिन्नाधार! ”

उदाहरण 2-
” हा! वृद्धा के अतुल धन हा! वृद्धता के सहारे! हा!
प्राणों के परम प्रिय हा! एक मेरे दुलारे! ”

यह भी पढ़ें- शृंगार रस किसे कहते हैं।

उदाहरण 3-
सोक बिकल सब रोवहिं रानि। रूपु सीलु बलु तेजु बखानी॥
करहिं बिलाप अनेक प्रकारा। परहिं भूमितल बारहिं बारा॥

करुण रस का उदाहरण

उदाहरण 4-
मम अनुज पड़ा है चेतनाहीन होके, तरल हृदयवाली जानकी भी नहीं है।
अब बहु दुःख से अल्प बोला न जाता, क्षणभर रह जाता है न उद्विग्नता से॥

उदाहरण 5-
जथा पंख बिनु खग अति दीना। मनि बिनु फ़न करिबर कर हीना॥
अस मम जिवन बन्धु बिन तोही। जौ जड़ दैव जियावै मोही॥

उदाहरण 6-
तात तात हा तात पुकारी। परे भूमितल व्याकुल भारी॥
चलन न देखन पायउँ तोही। तात न रामहिं सौंपेउ मोही

उदाहरण 7-
राम-राम कहि राम कहि, राम-राम कहि राम।
तन परिहरि रघुपति विरह, राउ गयउ सुरधाम॥

विडियो से सीखे करुण रस की परिभाषा

लेख के बारे में-

इस आर्टिकल में आपने करुण रस की परिभाषा इसके उदाहरण के साथ पढ़ा है, हमे उम्मीद है कि आपको यह जानकारी आवश्य समझ आयी होगी, इससे पहले हमने शृंगार रस के बारे में पढ़ा था। रस के अन्य प्रकारों को पढ़ते रहने के लिए हमें टेलीग्राम पर फॉलो करें।

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