कहानी किसे कहते हैं? कहानी की परिभाषा और कहानी लेखन के 6 तत्व

प्रिय पाठक! मैं विशाल सरस्वती आपका स्वागत करता हूँ the eNotes के एक नये आर्टिकल में, इसमें हम पढ़ेंगे कि कहानी किसे कहते हैं? साथ ही हम कहानी लेखन के तत्व भी जानेंगे। तो चलिए विस्तार से जानते है कहानी के बारे में-

कहानी किसे कहते हैं?

कहानी गद्य साहित्य की वह सबसे अधिक रोचक एवं लोकप्रिय विधा है, जो जीवन के किसी विशेष पक्ष का मार्मिक, भावनात्मक और कलात्मक वर्णन करती है। “हिन्दी गद्य की वह विधा है जिसमे लेखक किसी घटना, पात्र अथवा समस्या का क्रमबद्ध ब्यौरा देता है, जिसे पढ़कर एक समन्वित प्रभाव उत्पन्न होता है, उसे कहानी कहते हैं”।

अथवा “कहानी वह विधा है जो लेखक के किसी उद्देश्य किसी एक मनोभाव जैसे उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा-विन्यास, सब कुछ उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं”

कहानी किसे कहते हैं

कहानी का आरंभ मनुष्य के जन्म से ही माना जाता है। कहानी उपन्यास की तरह लम्बी नहीं होती हैं, यह किसी महत्त्वपूर्ण घटना पर आधारित होता है, यह किसी के जीवन का एक घटना पर आधारित होता है।

प्राचीनकाल में प्रचलित वीरों तथा राजाओं के शौर्य, प्रेम, न्याय, ज्ञान, वैराग्य, साहस, समुद्री यात्रा, अगम्य पर्वतीय प्रदेशों में प्राणियों का अस्तित्व आदि की कथाएँ, जिनकी कथानक घटना प्रधान हुआ करती थीं, भी कहानी के ही रूप हैं।

कुछ महान लेखको द्वारा कहानी किसे कहते हैं?-

मुंशी प्रेमचन्द जी द्वारा कहानी किसे कहते हैं?- “कहानी वह ध्रुपद की तान है, जिसमें गायक महफिल शुरू होते ही अपनी संपूर्ण प्रतिभा दिखा देता है, एक क्षण में चित्त को इतने माधुर्य से परिपूर्ण कर देता है, जितना रात भर गाना सुनने से भी नहीं हो सकता।”  

एडगर एलिन पो द्वारा कहानी किसे कहते हैं?- “कहानी वह छोटी आख्यानात्मक रचना है, जिसे एक बैठक में पढ़ा जा सके, जो पाठक पर एक समन्वित प्रभाव उत्पन्न करने के लिये लिखी गई हो, जिसमें उस प्रभाव को उत्पन्न करने में सहायक तत्वों के अतिरिक्‍त और कुछ न हो और जो अपने आप में पूर्ण हो।”

कहानी लेखन के तत्व

कहानी के कुछ विशेष तत्व होते हैं जो कहानी में रस भरते हैं। कहानी लेखन के 6 तत्व  निम्नलिखित हैं-

  • कथावस्तु
  • चरित्र-चित्रण
  • कथोपकथन 
  • देशकाल 
  • भाषा-शैली
  • उद्देश्य

कथावस्तु

कहानी के ढाँचे को कथानक अथवा कथावस्तु कहा जाता है, इसे कहानी का केंद्र माना जाता है। इसके अभाव में कहानी की रचना की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसके भी चार अंग होते हैं-आरम्भ, आरोह, चरम स्थिति तथा अवरोह।

चरित्र-चित्रण

कहानी का संचालन उसके पात्रों के द्वारा ही होता है तथा पात्रों के गुण-दोष को उनका ‘चरित्र चित्रण’ कहा जाता है।  

कथोपकथन या संवाद

कहानी में संवाद का भी विशेष महत्त्व है। इनके द्वारा पात्रों के मानसिक अन्तर्द्वन्द एवं अन्य मनोभावों को प्रकट किया जाता है।

देशकाल या वातावरण

किसी कहानी को असरदार बनाने के लिए ज़रूरी है कि देश काल का पूरा ध्यान रखा जाये, यह कहानी में वास्तविकता लाता है।

भाषा-शैली

कहानी के प्रस्तुतीकरण में कलात्मकता लाने के लिए देशकाल के अनुसार अलग-अलग भाषा व शैली से सजाया जाता है।

उद्देश्य

हर कहानी का अपना एक अलग उद्देश्य होता है, यह केवल मनोरंजन हेतु ही नहीं होता, इससे लोगों को प्रेरणा भी जाती है। धर्म प्रचारक अपने उद्देश्य को लोगों तक पहुँचाने के लिए कहानी का ही सहारा लेते हैं।


निष्कर्ष-

इस आर्टिकल में आपने जाना कि कहानी किसे कहते हैं? साथ ही आपने कहानी लेखन के तत्व भी जाने, हमें उम्मीद है कि आपको कहानी किसे कहते हैं? आवश्य समझ आई होगा। अगर समझने में कोई समस्या आ रही हो तो आप विडियो देख सकते हैं।

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