पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय | (1894 -1971)ई.

इस आर्टिकल में हम पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय पढेंगे। इससे पहले हम सूरदासतुलसीदास,रसखान, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय पढ़ चुके हैं।

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी – संक्षिप्त जीवन परिचय

नामपदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
जन्म1894 ई.
जन्म स्थानखैरागढ़ – जबलपुर (मध्य-प्रदेश)
पिता का नामउमराव बख्शी
आजीविकाअध्यापक, लेखक, पत्रकार
लेखन विधागद्य और पद्य
मृत्यु1971 ई.

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय

श्री पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जन्म सन् 1894 ई० में मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के खैरागढ़ नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता श्री उमराव बख्शी तथा बाबा पुन्नालाल बख्शी साहित्य-प्रेमी और कवि थे। इनकी माताजी को भी साहित्य से प्रेम था। अत: परिवार के साहित्यिक वातावरण का प्रभाव इनके मन पर भी गहरा पड़ा और ये विद्यार्थी जीवन से ही कविताएँ लिखने लगे।

बी०ए० उत्तीर्ण करने के बाद बख्शी जी ने साहित्य-सेवा को अपना लक्ष्य बनाया तथा कहानियाँ और कविताएँ लिखने लगे। द्विवेदी जी बख्शी जी की रचनाओं और योग्यताओं से इतने अधिक प्रभावित थे कि अपने बाद उन्होंने ‘सरस्वती’ की बागडोर बख्शी जी को ही सौंपी। द्विवेदी जी के बाद 1920 से 1927 ई० तक इन्होंने कुशलतापूर्वक ‘सरस्वती’ के सम्पादन का कार्य किया।

ये नम्र स्वभाव के व्यक्ति थे और ख्याति से दूर रहते थे। खैरागढ़ के हाईस्कूल में अध्यापन कार्य करने के पश्चात् इन्होंने पुनः ‘सरस्वती’ का सम्पादन-भार सँभाला। सन् 1971 ई० में 77 वर्ष की आयु में निरन्तर साहित्य-सेवा करते हुए आप गोलोकवासी हो गये।

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी की कृतियाँ-

बख्शी जी बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे इनकी रचनाओं का विवरण निम्नवत् है

निबन्ध-संग्रह-‘पंचपात्र’, ‘पद्मवन’, ‘तीर्थरेणु’, ‘प्रबन्ध-पारिजात’, कुछ बिखरे पन्ने’, ‘मकरन्द बिन्दु’, ‘यात्री’, ‘तुम्हारे लिए’, ‘तीर्थ- सलिल’ आदि।

काव्य-संग्रह –शतदल‘ और ‘अश्रुदल’।

कहानी- ‘संग्रह-‘झलमला’ और ‘अञ्जलि’।

आलोचना- ‘हिन्दी-साहित्य विमर्श’, ‘विश्व-साहित्य’, ‘हिन्दी उपन्यास साहित्य’, ‘हिन्दी कहानी साहित्य’, ‘साहित्य शिक्षा’ आदि।

अनूदित रचनाएँ- जर्मनी के मॉरिस मेटरलिंक के दो नाटकों का ‘प्रायश्चित्त’ और ‘उन्मुक्ति का बन्धन’ शीर्षक से अनुवाद। 

सम्पादन- सरस्वती’ और ‘छाया।

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जी का साहित्य में स्थान-

बख्शी जी भावुक कवि, श्रेष्ठ निबन्धकार, निष्पक्ष आलोचक, कुशल पत्रकार एवं कहानीकार हैं। आलोचना और निबन्ध के क्षेत्र में इनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। विश्व-साहित्य में इनकी गहरी पैठ है। अपने ललित निबन्धों के लिए ये सदैव स्मरण किये जाएँगे। विचारों की मौलिकता और शैली की नूतनता के कारण हिन्दी-साहित्य में शुक्ल युग के निबन्धकारों में इनके निबन्धों का विशिष्ट स्थान है ।


Conclusion – इस आर्टिकल में आपने पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय पढ़ा । हमें उम्मीद है कि, यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी रहा होगा। हिन्दी विषय से सम्बंधित पोस्ट पढ़ते रहने के लिए हमें टेलीग्राम पर फॉलो करे।

3 thoughts on “पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय | (1894 -1971)ई.”

    • इस ब्लॉग पर आपका कीमती समय देने तथा एक सुंदर टिप्पड़ी करने के लिए धन्यवाद,

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  1. Padumlal punnalal ke article padkar but he acha se sajm me agye hai or information dane ke liye than u✍️✍️

    Mai bhi apne site GoodGlo par bhi article publice hai jis me btaya gya hai ki blog website kya hota hai our kaise banaya

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