रसखान का जीवन परिचय | Raskhan ka Jeevan Parichay

नमस्ते दोस्तों, इस आर्टिकल में हम रसखान का जीवन परिचय (Raskhan ka Jeevan Parichay) पढेंगे। इससे पहले हम सूरदासतुलसीदास, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल और डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय पढ़ चुके हैं।

रसखान का जीवन परिचय

संक्षिप्त जीवन परिचय – रसखान

रसखान का जन्म सन् 1548 में हुआ था, उनका असली नाम सैयद इब्राहिम था जो दिल्ली के रहने वाले थे। सन् 1628 के लगभग उनकी मृत्यु हुई। तो आईये एक शब्द में  रसखान का जीवन परिचय देखते हैं-

नाम रसखान
मूल नाम सैयद इब्राहिम
जन्म सन् 1548 ई. – दिल्ली
मृत्यु सन् 1628 ई. – ब्रज
गुरु गोस्वामी बिट्ठलदास जी
प्रमुख रचनाएँ 1. सुजान ‘रसखान’
2. प्रेमवाटिका
भाषा ब्रज भाषा
भक्ति कृष्णभक्ति

रसखान का जीवन परिचय : Raskhan ka Jeevan Parichay

हिंदी साहित्य और ब्रज भाषा प्रेमी कृष्णभक्त मुस्लिम कवि रसखान का जन्म सन् 1548 ई. में हुआ था, उनका असली नाम सैयद इब्राहिम था। विद्वानों में इनके जीवन काल को लेकर मतभेद है, लेकिन रसखान द्वारा रचित ग्रन्थ ‘प्रेमवाटिका‘  से प्राप्त संतेतानुसार इनका जन्म दिल्ली राजवंश में हुआ था। रसखान कृष्णभक्त थे, इन्होने अपना सारा जीवन गोकुल की गलियों में भजन-कीर्तन में गुजार दिया।

इनके कृष्णभक्ति से प्रभावित होकर गोस्वामी बिट्ठलदास जी ने इन्हें अपना शिष्य बना लिया और बल्लभ संप्रदाय के अंतर्गत पुष्टि मार्ग की दीक्षा प्रदान की। वैष्णव धर्म में दीक्षा लेने के बाद इनका लौकिक प्रेम अलौकिक प्रेम में बदल गया। इनका अधिकांश जीवन ब्रजभूमि पर व्यतीत हुआ, भगवान श्री कृष्ण के प्रति इनका अलौकिक प्रेम इन्हें उनका अनन्य भक्त बनाता हैं। 1614 ई. इनके अंतिम काव्य-कृति ‘प्रेमवाटिका’ का उल्लेख मिलता है और इसी के कुछ वर्ष बाद लगभग 1628 ई. में इनकी मृत्यु वृन्दावन में हुई थी।

साहित्य परिचय

रसखान को रस की खान कहते थे, अरबी और फारसी भाषा में अच्छी पकड़ होने के कारण इनकी अधिकतर रचनाएँ इन्हीं भाषा में मिलती हैं। इनके काव्य में भक्ति और शृंगार रस दोनों प्रधानता मिलती हैं। काव्य के अलावां इन्होने पिंगलशास्त्र का भी गहन अध्ध्यन किया था। इनकी काव्य रचना से ऐसा प्रतीत होता है कि यह संयोग और वियोग दोनों पक्षो के अभिव्यक्ति थे।  काव्य के सभी सौन्दर्य गुणों का प्रयोग कर इन्होने श्री कृष्ण के बाल रूप और यौवन के मोहक रूपों का वर्णन अपनी कवताओं में किया है।

रसखान की रचनाएँ

रसखान द्वारा रचित दो रचनाओं निम्नलिखित है –

1. सुजान ‘रसखान’

139 छंद वाले इस संग्रह में भक्ति और प्रेम विषय पर मुक्त काव्य है। सुजान ‘रसखान’  में कवित्त, दोहा, सोरठा और सवैये हैं।

2. प्रेमवाटिका

इस रचना में प्रेम-रस का पूर्ण परिपाक हुआ है | 25 दोहे वाले इस रचना में त्यागमय और निष्काम स्वरुप का काव्यात्मक वर्णन है |

भाषा शैली

इनकी रचनाओं में सरल व सहज भाषा स्वरुप का प्रयोग हुआ है, इनकी अधिकतम रचनाएँ ब्रज भाषा में हैं। रसखान को रस की खान कहा जाता था, इनकी रचनाओं में दोहा, कवित्त और सवैया पर पूर्ण अधिकार था।

साहित्य में स्थान

कृष्णभक्त कवियों में रसखान का महत्वपूर्ण स्थान रहा है, इनकी भक्ति ह्रदय की मुक्त साधना है। डॉ. विजयेन्द्र स्नातक इनके बारे में लिखते हैं कि, “इनकी भक्ति हृदय की मुक्त साधना है और श्रृंगार वर्णन भाऊक हृदय की उन्मुक्त अभिव्यक्ति है। इनके काव्य इनके स्वच्छंद मन के सहज उद्गार हैं। ” इनके काव्य में भावनाओं की तीव्रता गहनता और तन्मयता को देखकर भारतेंदु जी ने कहा था। –

“इन मुसलमान हरिजनन पै कोटिन हिन्दू वारिये |”


Conclusion – इस आर्टिकल में आपने रसखान का जीवन परिचय (Raskhan ka Jeevan Parichay) पढ़ा । हमें उम्मीद है कि, यह आर्टिकल आपके लिए उपयोगी रहा होगा। हिन्दी विषय से सम्बंधित पोस्ट पढ़ते रहने के लिए हमें टेलीग्राम पर फॉलो करे। अथवा नीचे दाईं ओर दिए गए बेल आइकॉन को प्रेस कर allow पर क्लिक करें और हमे सब्सक्राइब करें | इस आर्टिकल के बारे में अपनी राय हमें कमेंट करें। धन्यवाद

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