वचन किसे कहते हैं और वचन के कितने भेद होते हैं

हिंदी व्याकरण में वचन का अर्थ संख्यावचन से होता है, संख्यावचन को संज्ञा के अंदर पढ़ा जाता है । तो आज हम पढेंगे कि वचन किसे कहते हैं और वचन के कितने भेद होते हैं? इससे पहले संज्ञा और लिंग के बारे में पढ़ चुके हैं।

वचन किसे कहते हैं

वचन का अभिप्राय संख्या से है। विकारी शब्दों के जिस रूप से उनकी संख्या (एक या अनेक) का बोध होता है, उसे वचन कहते हैं। अर्थात संज्ञा के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु के संख्या का  बोध होता है, उसे वचन कहते हैं।  जैसे- (पुस्तक-पुस्तकें,  घोड़ा-घोड़े,  लड़का-लड़के आदि)

वचन के कितने भेद होते हैं

हिन्दी में वचन दो प्रकार के होते हैं—एकवचन और बहुवचन।

एकवचन (Singular) :- शब्द के जिस रूप से एक वस्तु या एक पदार्थ का ज्ञान होता है, उसे एकवचन कहते हैं। जैसे-बालक, घोड़ा, किताब, मेज आदि।

बहुवचन (Plural) :- शब्द के जिस रूप से अधिक वस्तुओं या पदार्थों का ज्ञान होता है, उसे बहुवचन कहते हैं जैसे-बालकों, घोड़ों, किताबों, मेजों आदि


उपसर्ग बनाने में प्रमुख प्रत्यय

1. :-आकारान्त पुंलिंग, तद्भव संज्ञाओं में अन्तिम ‘आ के स्थान पर’ ए’ कर देने से बहुवचन हो जाता है। जैसे-
घोडा-घोड़े
लड़का-लडकें
गधा-गधे

2. एँ :-अकारान्त एवं आकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों में एँ जोड़ने पर वे बहुवचन बन जाते हैं। जैसे-
पुस्तक-पुस्तकें
सड़क-सड़कें
लेखिका-लेखिकाएँ
बात-बातें
माता-माताएँ
गाय-गायें

3. याँ :-याँ इकारान्त, ईकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों में जुड़कर उसे बहुवचन बना देता है। जैसे-
जाति-जातियाँ
नदी-नदियाँ
रीति-रीतियाँ
लड़की-लड़कियाँ

4. ओं :-ओं का प्रयोग करके भी बहुवचन बनते हैं, जैसे-
कथा-कथाओं
माता-माताओं
साधु-साधुओं
बहन-बहनों


लेख के बारे में-

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