विराम चिन्ह – Viram chinh kise kahate hain

प्रिय पाठक! स्वागत है आपका the eNotes के एक नए आर्टिकल में, इस आर्टिकल में हम विराम चिन्ह | Viram chinh kise kahate hain के बारे में पढेंगे और जानेंगे कि विराम चिन्ह किसे कहते हैं। आगे बढ़ने से पहले आपको बता दें की अगर अप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो हिन्दी की तैयारी के लिए आप इस वेबसाइट को फॉलो करें अथवा आप सामान्य हिन्दी का यह किताब देख सकते हैं।

विराम चिन्ह

विराम चिन्ह | Viram chinh kise kahate hain

‘विराम’ शब्द का अर्थ है-रुकना या ठहरना। किसी बात को लगातार कहा अथवा पढ़ा नहीं जा सकता है। जब हम अपने भावों को भाषा द्वारा अभिव्यक्त करते हैं तब एक भाव की अभिव्यक्ति के बाद कुछ समय के लिए रुकते हैं, इस ठहराव को ही ‘विराम’ कहते हैं।

इस विराम को प्रकट करने के लिए कुछ चिन्हों का प्रयोग किया जाता है। इन विशेष चिन्हों को विराम चिन्ह कहते हैं। अर्थात लिखते समय रुकने का भाव प्रदर्शित करने के लिए जिन चिन्हों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें विराम-चिन्ह कहा जाता है। यदि विराम चिन्हों का उचित प्रकार से प्रयोग न किया जाए तो अर्थ का अनर्थ हो सकता है, जैसे  (i) रोको मत, जाने दो। (ii) रोको, मत जाने दो।

इन वाक्यों में केवल एक चिन्ह (,) के भिन्न-भिन्न स्थानों पर लगाने से पूरा अर्थ ही बदल रहा है। प्रथम वाक्य में रोकने के लिए कहा जा रहा है तथा दूसरे वाक्य में न रोकने के लिए कहा जा रहा है।

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Viram chinh kise kahate hain

विराम चिन्ह का प्रयोग क्यों किया जाता है?

किसी भी भाषा के सम्यक् ज्ञान एवं सुप्रयोग के लिए विराम-चिन्हों का ज्ञान अनिवार्य है। यदि बिना विराम के लिखते या बोलते चले जाएँ तो श्रोता या पाठक के लिए उस भाषा को समझना कठिन हो जाएगा। अतः कथन के स्पष्टीकरण, शैली की गतिशीलता एवं विचारों को सुबोध बनाने के लिए विराम-चिन्ह का अभ्यास करना आवश्यक है।

यदि इन चिन्हों का प्रयोग नहीं किया जाएगा तो पढने वाले को समझने में दिक्कत हो सकती है। इसलिए आवश्यक है कि जब भी हम अपने भावों को भाषा द्वारा अभिव्यक्त करें तो एक भाव की अभिव्यक्ति के बाद कुछ क्षण के लिए रुकें नहीं तो अर्थ का अनर्थ हो सकता है।

विराम चिन्ह के प्रकार

  1. अल्प विराम (,)
  2. अद्ध विराम (;)
  3. पूर्ण विराम (।)
  4. प्रश्नसूचक (?)
  5. विस्मयसूचक (!)
  6. विवरण चिन्ह ()
  7. कोष्ठक चिन्ह ( { () } )
  8. पुनरुक्ति-सूचक चिन्ह (, ,)
  9. संयोजक चिन्ह (-)
  10. उद्धसरण चिन्ह (“……”)
  11. लोप चिन्ह (xxx)
  12. लाघव चिन्ह (0)

1. अल्प-विराम (Comma) –

जब एक वाक्य में कई समान पदों का वर्णन करना होता है, तब इसका प्रयोग किया जाता है; जैसे-

  • मैं, अजय, प्रगति और गौरव मिलकर बाज़ार गए।
  • दाल, मसाले, चावल आदि सब कुछ तो महँगे हैं।

2. अर्द्ध विराम (Semicolon) –

जहाँ अल्प-विराम की अपेक्षा कुछ अधिक समय के लिए रुकना होता है, वहाँ अर्द्ध विराम का प्रयोग होता है, जैसे-

  • वे भाषण सुनने में व्यस्त हैं; भला जल्दी कैसे आ सकते हैं?
  • वह बेईमान है; उसके संरक्षक भी ऐसा ही कहते हैं।

3. पूर्ण विराम (Full Stop) –

जहाँ वाक्य पूर्ण हो जाता है, वहाँ पूर्ण विराम का प्रयोग होता है; जैसे-

  • प्रीति अपना कार्य समाप्त कर चुकी है।
  • हम अपने देश के गौरव व मान का पूरा ध्यान रखते हैं।

4. प्रश्नवाचक चिन्ह (Question Mark) –

जिस वाक्य के द्वारा प्रश्न किया जाता है, वहाँ प्रश्नवाचक चिन्ह का प्रयोग किया जाता है; जैसे-

  • गौरी कहाँ रहती है?
  • तुम कल विद्यालय में क्यों नहीं आए?

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5. सम्बोधन चिन्ह / विस्मयसूचक (Sign of Interjection) –

वाक्य में जहाँ विस्मय, घृणा, शोक, खुशी, ग्लानि अथवा सम्बोधन का भाव होता है, वहाँ इस चिन्ह का प्रयोग करते हैं; जैसे-

  • अरे! यह तो मर गया।
  • छिः छिः! इतनी नीचता।
  • वाह! वह तो उत्तीर्ण हो गया।

6. कोष्ठक (Bracket) –

इस चिन्ह का प्रयोग पद का अर्थ प्रकट करने हेतु, क्रम-बोध और नाटक या एकांकी में अभिनय के भावों को प्रकट करने के लिए किया जाता है; जैसे-

  • निरंतर (लगातार) प्रातः भ्रमण करने से स्वास्थ्य ठीक रहता है।
  • मोहन (सोहन से) तुम्हारा घर कहाँ है?

7. आदेश चिन्ह (Sign of Following) –

किसी विषय को क्रमशः वर्णन करने या शीर्षक के आगे उसे स्पष्ट करने अथवा परिभाषा उपभेद बताने के लिए इस चिन्ह का प्रयोग करते हैं; जैसे-

  • वचन के तीन भेद होते हैं:-एकवचन द्विवचन बहुवचन।
  • प्रत्यय के दो भेद होते हैं:-कृत प्रत्यय, तद्धित प्रत्यय

8. निर्देशक चिन्ह (Dash) –

यह चिन्ह शब्द की व्याख्या करने अथवा उदाहरण देने के लिए किया जाता है;  जैसे

  • जवाहरलाल नेहरू ने कहा था-आराम हराम है।
  • संज्ञा-स्थान, वस्तु या व्यक्ति के नाम को संज्ञा कहते हैं।

9. लाघव चिन्ह (Abbreviation Sign) –

किसी बड़े शब्द को संक्षेप में लिखने के लिए उसके प्रथम अक्षर को लिखकर आगे शून्य (0) लगा देते हैं; जैसे

  • पंडित = पं0 जवाहर लाल नेहरू देश के प्रथम प्रधानमंत्री थे।
  • डॉक्टर = डॉ0 ने मरीज की देखभाल ठीक से की।

10. संयोजक चिन्ह (Hyphen) –

सामासिक पद की विभक्ति का निर्देश या जोड़े वाले शब्दों के मध्य ‘और’ शब्द के स्थान पर इस चिन्ह का प्रयोग करते हैं; जैसे

  • माता-पिता की सेवा करो।
  • राम-लक्ष्मण वन को गए।

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11. उद्धरण चिन्ह (Inverted Commas) –

जब किसी की उक्ति को ज्यों का त्यों उद्धृत किया जता है, तब वहाँ उद्धरण चिन्ह का प्रयोग किया जाता है; जैसे

  • लोकमान्य जी ने घोषणा की, “स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।”
  • नेताजी ने कहा, “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।”

12. त्रुटिपूरक चिन्ह (Fill mistake sign) –

कभी-कभी लिखते समय वाक्य में कोई शब्द छूट जाता है, उस छूटे स्थान पर इस चिन्ह को लगाकर ऊपर छूटे शब्द को लिख दिया जाता है।

आपने क्या सिखा?

इस आर्टिकल में आपने जाना की विराम चिन्ह | Viram chinh kise kahate hain. हमें उम्मीद है कि यह जानकारी आपको आवश्य समझ में आई होगी, इसी से सम्बंधित और आर्टिकल पढ़ते रहने के लिए इस the eNotes को बुकमार्क करें और हमारे WhatsApp Broadcast Group से जुड़ें।

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