वीर रस की परिभाषा और वीर रस के 10 उदाहरण

प्रिय पाठक! स्वागत है आपका the eNotes के एक नए आर्टिकल में इस आर्टिकल में हम वीर रस (Veer Ras) के बारे में पढेंगे साथ ही हम वीर रस की परिभाषा और वीर रस के उदाहरण भी देखेंगे। इससे पहले हमने रस के अन्य प्रकार जैसे हास्य रस, शांत रस आदि के बारे में पढ़ चुके हैं। तो चलिए विस्तार से पढ़ते हैं वीर रस की परिभाषा –

वीर रस की परिभाषा
वीर रस की परिभाषा

वीर रस की परिभाषा। Veer ras ki paribhasha

युद्ध अथवा कठिन कार्य को करने के लिए ह्रदय में निहित उत्साह नमक स्थाई भाव के जाग्रत होने के प्रभाव स्वरूप जो भाव उत्पन्न होता है, उसे वीर रस कहते है, यही उत्साह नामक स्थायी भाव, विभाव, अनुभाव व्यभिचारी भाव आदि के द्वारा पुष्ट होता है तो Veer Ras की निष्पत्ति होती है।

  • वीर रस किसे कहते हैं- जब कोई कार्य करने अथवा किसी रचना आदि के पढने पर मन में जो उत्साह का भाव उत्पन्न होता है, उसे वीर रस कहते हैं।
  • वीर रस का स्थायी भाव क्या है?- वीर रस का स्थाई भाव उत्साह होता है।

यह भी पढ़ें – रस किसे कहते हैं ? रस के अवयव और प्रकार

वीर रस के अवयव

स्थायी भाव-  उत्साह
संचारी भाव- आवेग, गर्व, उग्रता, अमर्ष, असूया
आलम्बन- शत्रु व याचक
उद्दीपन- शत्रु का अहंकार, वीरों की हुंकार, दुखियों का दुःख, याचक की प्रशंसा
अनुभाव-  अंग स्फुरण, रोंगटे खड़े हो जाना

वीर रस के प्रकार । Veer Ras ke prakar

आलम्बन भेद के आधार पर उत्साह चार प्रकार के होते हैं-

  1. युद्धवीर- जब युद्ध के लिए उत्साह हो
  2. दयावीर- जब दीनों पर दया करने का उत्साह हो
  3. धर्मवीर- जब धर्म प्रचार अथवा धर्म कार्य करने का उत्साह हो
  4. दानवीर- जब दीनों को दान करने का उत्साह हो

वीर रस के उदाहरण। Veer ras ke udaharan

वीर रस का सबसे प्रचलित उदाहरण आपको महाराणा प्रताप और रानी लक्ष्मीबाई के जीवन कर्म पर मिलेंगे-

1. झाँसी वाली रानी थी

बुन्देलों हरबोलो के मुह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मरदानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥

2. घननाद का रव

सौमित्रि से घननाद का रव अल्प भी न सहा गया।
निज शत्रु को देखे विना, उनसे तनिक न रहा गया।
रघुवीर से आदेश ले युद्धार्थ वे सजने लगे।
रणवाद्य भी निर्घाष करके धूम से बजने लगे।

3. सिवाजी जंग जीतन चलत है

साजि चतुरंग सैन अंग उमंग धारि
सरजा सिवाजी जंग जीतन चलत है।
भूषन भनत नाद बिहद नगारन के
नदी नाद मद गैबरन के रलत हैं॥

4. वीर तुम बढ़े चलो

वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो।
हाथ में ध्वज रहे बाल दल सजा रहे,
ध्वज कभी झुके नहीं दल कभी रुके नहीं
वीर तुम बढ़े चलो, धीर तुम बढ़े चलो।
सामने पहाड़ हो सिंह की दहाड़ हो
तुम निडर डरो नहीं तुम निडर डटो वहीं
वीर तुम बढ़े चलो धीर तुम बढ़े चलो।

5. सुकुमार मत जानों मुझे

सत्य कहता हूँ सखे, सुकुमार मत जानों मुझे,
यमराज से भी युद्ध में, प्रस्तुत सदा मानो मुझे।
है और कि तो बात क्या, गर्व मैं करता नही,
मामा तथा निज तात से भी युद्ध में डरता नहीं॥

प्रतियोगी परीक्षा के लिए वीर रस के महत्त्वपूर्ण उदाहरण

6. पैदल के संग पैदल भिरिगे

बातन बातन बतबढ़ होइगै, औ बातन माँ बाढ़ी रार,
दुनहू दल मा हल्ला होइगा दुनहू खैंच लई तलवार।
पैदल के संग पैदल भिरिगे औ असवारन ते असवार,
खट-खट खट-खट टेगा बोलै, बोलै छपक-छपक तरवार॥

7. रजकण कर देने को चंचल

जय के दृढ विश्वासयुक्त थे दीप्तिमान जिनके मुखमंडल
पर्वत को भी खंड-खंड कर रजकण कर देने को चंचल
फड़क रहे थे अतिप्रचंड भुजदंड शत्रुमर्दन को विह्वल
ग्राम ग्राम से निकल-निकल कर ऐसे युवक चले दल के दल

8. कंटक-जाल लगे पुनि जोये

ऐसे बेहाल बेवाइन सों पग, कंटक-जाल लगे पुनि जोये।
हाय! महादुख पायो सखा तुम, आये इतै न किते दिन खोये॥
देखि सुदामा की दीन दसा, करुना करिके करुनानिधि रोये।
पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सौं पग धोये॥

9. लच्छन तच्छन रक्त किये

क्रुद्ध दशानन बीस भुजानि सो लै कपि रिद्द अनी सर बट्ठत
लच्छन तच्छन रक्त किये, दृग लच्छ विपच्छन के सिर कट्टत

10. बलिदान की ज्वाला

फहरी ध्वजा, फड़की भुजा, बलिदान की ज्वाला उठी।
निज जन्मभू के मान में, चढ़ मुण्ड की माला उठी।

Conclusion: इस आर्टिकल में आपने Veer Ras के बारे में पढ़ा साथ ही आपने वीर रस की परिभाषा और वीर रस के उदाहरण भी देखें, हमे उम्मीद है कि आपको वीर रस की परिभाषा आवश्य समझ आया होगा। अगर अभी भी समझने में कोई समस्या आ रही हो तो कमेंट बॉक्स में पूछें अथवा विडियो देखें।

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1 thought on “वीर रस की परिभाषा और वीर रस के 10 उदाहरण”

  1. बुन्देलों हरबोलो के मुह हमने सुनी कहानी थी।
    खूब लड़ी मरदानी वह तो झाँसी वाली रानी थी॥
    Sir, please iska स्पस्टिकरण de dijiye

    Reply

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