श्रृंगार रस – Shringar ras ki paribhasha | श्रृंगार रस का उदाहरण

प्रिय पाठक, स्वागत है आपका the eNotes के एक नए आर्टिकल में- इस आर्टिकल में हम Shringar ras ki paribhasha और शृंगार रस का उदाहरण देखेंगे। इससे पहले हम रस किसे कहते हैं? छंद किसे कहते हैं? और मात्रिक छंद के बारे में पढ़ चुके हैं। किसी अन्य टॉपिक पर पढ़ने के लिए निचे कमेंट करें । तो चलिए दोस्तों पढ़ते हैं “Shringar ras ki paribhasha” और शृंगार रस का उदाहरण –

श्रृंगार रस की परिभाषा । Shringar Ras ki paribhasha

परिभाषा- जब पति-पत्नी / प्रेमी-प्रेमिका / नायक-नायिका के मन में स्थाई भाव रति जागृत होकर आस्वादन के योग्य हो जाता है, तो इसे शृंगार रस कहा जाता है। शृंगार रस में प्रेम का वर्णन होता है।

जब विभाव, अनुभाव और व्यभिचारी के संयोग से रति नामक स्थायी भाव रस रूप में परिणत हो, तो उसे शृंगार रस कहते हैं। शृंगार रस को रसराज अर्थात रसों का राजा भी कहा जाता है।

श्रृंगार रस का उदाहरण। Shringar ras ka udaharan

श्रृंगार रस का उदाहरण निम्न हैं-

उदाहरण-1

कर मुंदरी की आरसी, प्रतिबिम्बित प्यौ पाइ।
पीठ दिये निधरक लखै, इकटक दीठि लगाइ॥

स्पष्टीकरण–

स्थायी भाव–रति
आश्रय–नवोढ़ा बधू
आलम्बन–प्रियतम (नायक)
उद्दीपन–प्रियतम का प्रतिधिम्ब
अनुभाव–एक टंक से प्रतिविम्ब को देखना
व्यभिचारी भाव–हर्ष, औत्सुक्य

उदाहरण-2

हौं ही बोरी बिरह बरा, कैे बोरों सब गाउँ।
कहा जानिए कहत है, समिहि सीतकर नाउँ॥

स्पष्टीकरण-
स्थायीभाव–रति
आश्रय–विरहिणी नायिका
उद्दीपनचन्द्रमा, चाँदनी
व्यभिचारी भाव–विषाद, आवेग, देन्य आदि
आलम्बन–प्रियतम (नायक)
अनुभाव–अश्रु, स्वेद आदि

Shringar ras ki paribhasha
Shringar ras ki paribhasha

अन्य उदाहरण

1. सतापों को विपुल बढ़ता देख के दुःखिता हा।
घार बोली स-दुःख उससे श्रीमती राधिका यों॥
प्यारी प्रात: पवन इतना क्यों मुझे है सताती।
क्या तू भी है कलुषित हुई काल की क्रूरता से॥

2. लज्जाशीला पथिक महिला जो कहीं दृष्टि आये।
होने देना विकृत-वसना तो न तू सुन्दरी को॥
जो थोड़ी भी श्रमित बह हौ गोद ले श्रान्ति खोना।
होठों की ओ कमल-मुख की म्लानतायें मिटाना॥

3. मन की मन ही माँझ रही
कहिए जाइ कौन पै ऊधौ, नाही परत कही
अवधि अधार आस आवन की, तन मन बिथा सही
अब इन जोग संदेशनि, सुनि-सुनि बिरहिनी बिरह दही।

4. “कहत, नटत, रीझत, खीझत, मिलत, खिलत, लजियात।
भरै भौन में करत है, नैनन ही सों बाता। ”

श्रृंगार रस के प्रकार। Shringar Ras ke prakar

श्रृंगार रस दो प्रकार के होते हैं-

  1. संयोग शृंगार रस
  2. वियोग / विप्रलंभ रस

संयोग शृंगार रस (Sanyog Shringar Ras)

जब संयोग काल में नायक और नायिका की पारस्परिक मिलन अथवा आलिंगन की अनुभूति होती है, वहाँ संयोग शृंगार रस होता है। इस रस में दांपत्य को सुख की प्राप्ति होती है। उदाहरण-

बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय।
सौंह करे, भौंहनि हँसे, दैन कहै, नटि जाय। (बिहारी)

वियोग शृंगार रस (Viyog Shringar Ras)

इस रस में नायक और नायिका के बीच प्रेम का वर्णन तो होता है किंतु मिलन का अभाव होता है। इस रस में दांपत्य को वियोग में विरह होता है। उदाहरण-

निसिदिन बरसत नयन हमारे सदा रहति पावस ऋतु हम पै जब ते स्याम सिधारे॥ (सूरदास)


लेख के बारे में-

इस आर्टिकल में आपने Shringar ras ki paribhasha. शृंगार रस का उदाहरण के साथ पढ़ा, हमें उम्मीद है कि Shringar ras ki paribhasha की यह जानकारी आपको अवश्य पसंद आई होगी।

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1 thought on “श्रृंगार रस – Shringar ras ki paribhasha | श्रृंगार रस का उदाहरण”

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