Sumitranandan Pant ka Jivan Parichay – सुमित्रानंदन पंत

नमस्ते दोस्तों, इस आर्टिकल में हम Sumitranandan Pant ka Jivan Parichay – सुमित्रानंदन पन्त का जीवन परिचय पढेंगे। इससे पहले हम सूरदासतुलसीदास,रसखान, आचार्य रामचन्द्र शुक्ल, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय पढ़ चुके हैं।

Sumitranandan Pant ka Jivan Parichay

Sumitranandan Pant ka Jivan Parichay – सुमित्रानंदन पंत का संक्षेप में जीवन परिचय

नाम सुमित्रानंदन पंत
पिता का नाम पंडित गंगादत्त
जन्म-स्थान बसुआ (गोविंदपुर)
जन्म 20 मई, 1900
मृत्यु 28 दिसम्बर, 1977
प्रमुख रचनाएँ वीणा, ग्रन्थि, पल्लव, गुंजन, स्वर्ण किरण, युगान्त, युगवाणी, लोकायतन, चिदम्बरा, रजतरश्मि, शिल्पी, ज्योत्स्ना और हार
उपलब्धि ऑल इण्डिया रेडियो के परामर्शदाता, साहित्य अकादमी पुरस्कार, सोवियत भूमि पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार, पद्मभूषण उपाधि

आप पढ़ रहें हैं- Sumitranandan Pant ka Jivan Parichay
यह भी पढ़ें- डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय
यह भी पढ़ें- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जीवन परिचय

Sumitranandan Pant ka Jivan Parichay – सुमित्रानंदन पन्त का जीवन परिचय

कवि सुमित्रानंदन पन्त का जन्म 20 मई, 1900 को अल्मोड़ा के निकट कौसानी ग्राम में हुआ था | इनके पिता का नाम पंडित गंगादत्त था | जन्म के दिन ही इनके माता का देहांत हो गया, अतः इनका पालन-पोषण इनकी दादी ने किया | इनकी प्रारम्भिक शिक्षा कौसानी गाँव में तथा उच्च शिक्षा का पहला चरण अल्मोड़ा में और बाद में बनारस के ‘क्वींस’ कॉलेज से हुआ।

इनका काव्यगत सृजन यहीं से प्रारम्भ हुआ। इन्होंने स्वयं ही अपना नाम ‘गुसाईं दत्त’ से बदलकर सुमित्रानन्दन पन्त रख लिया। ‘सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित होने पर इनकी रचनाओं ने काव्य-मर्मज्ञों के हृदय में अपनी धाक जमा ली।  काशी में पन्त जी का परिचय सरोजिनी नायडू तथा रवीन्द्रनाथ टैगोर के काव्य के साथ-साथ अंग्रेजी की रोमाण्टिक कविता से हुआ और यहीं पर इन्होंने कविता प्रतियोगिता में भाग लेकर प्रशंसा प्राप्त की।

वर्ष 1950 में ये ‘ऑल इण्डिया रेडियो’ के परामर्शदाता पद पर नियुक्त हुए और वर्ष 1957 तक ये प्रत्यक्ष रूप से रेडियो से सम्बद्ध रहे। ये छायावाद के प्रमुख स्तम्भों में से एक थे। इन्होंने वर्ष 1916-1977 तक साहित्य सेवा की। 28 दिसम्बर, 1977 को प्रकृति का यह सुकुमार कवि पंचतत्त्व में विलीन हो गया।

आप पढ़ रहें हैं- Sumitranandan Pant ka Jivan Parichay
यह भी पढ़ें- डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय
यह भी पढ़ें- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जीवन परिचय

Sumitranandan Pant ka Sahityik Parichay – सुमित्रानंदन पन्त का साहित्यिक परिचय

सुमित्रानन्दन पन्त छायावादी युग के महान् कवियों में से एक माने जाते हैं। 7 वर्ष की अल्पायु से ही सुमित्रानंदन ने कविताएँ लिखना प्रारम्भ कर दिया था। वर्ष 1916 में इनकी पहली रचना ‘गिरजे का घण्टा’ प्रकाशित हुई। इलाहाबाद के ‘म्योर कॉलेज’ में प्रवेश लेने के उपरान्त साहित्यिक  के प्रति रुचि और भी अधिक विकसित हो गई। वर्ष 1920 में इनकी रचनाएँ ‘उच्छ्वास’ और ‘ग्रन्थि’ में प्रकाशित हुईं। इनके उपरान्त वर्ष 1927 में इनके ‘वीणा’ और ‘पल्लव’ नामक दो काव्य-संग्रह प्रकाशित हुए।

इन्होंने ‘रूपाभ’ नामक एक प्रगतिशील विचारों वाले पत्र का सम्पादन भी किया। वर्ष 1942 में इनका सम्पर्क महर्षि अरविन्द घोष से हुआ। इन्हें ‘कला और बूढ़ा चाँद’ पर ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’, लोकायतन पर ‘सोवियत भूमि पुरस्कार’ और ‘चिदम्बरा’ पर भारतीय ‘ज्ञानपीठ’ पुरस्कार मिला। भारत सरकार ने पन्त जी को ‘पद्मभूषण’ की उपाधि से अलंकृत किया।

Sumitranandan Pant ki Kritiyan – सुमित्रानंदन पन्त की कृतियाँ

सुमित्रानंदन पन्त की कृतियाँ निम्नलिखित हैं।

  1. काव्य- वीणा, ग्रन्थि, पल्लव, गुंजन, स्वर्ण किरण, युगान्त, युगवाणी, लोकायतन, चिदम्बरा
  2. नाटक- रजतरश्मि, शिल्पी, ज्योत्स्ना
  3. उपन्यास- हार
  4. अन्य रचनाएँ- पल्लविनी, अतिमा, युगपथ, ऋता, स्वर्ण किरण, उत्तरा, कला और बूढ़ा चाँद, शिल्पी, स्वर्ण धूलि आदि

Sumitranandan Pant ka Sahity me sthan – साहित्य में स्थान

पन्त जी सौन्दर्य के उपासक थे। प्रकृति, नारी और कलात्मक सौन्दर्य इनकी सौन्दर्यानुभूति के तीन मुख्य केन्द्र रहे। इनके काव्य-जीवन का आरम्भ प्रकृति-चित्रण से हुआ। इनके प्रकृति एवं मानवीय भावों के चित्रण में कल्पना एवं भावों की सुकुमार कोमलता के दर्शन होते हैं।

इसी कारण इन्हें प्रकृति का सुकुमार एवं कोमल भावनाओं से युक्त कवि कहा जाता है। पन्त जी का सम्पूर्ण काव्य आधुनिक साहित्य चेतना का प्रतीक है, जिसमें धर्म, दर्शन, नैतिकता, सामाजिकता, भौतिकता, आध्यात्मिकता सभी का समावेश है।

आप पढ़ रहें हैं- Sumitranandan Pant ka Jivan Parichay
यह भी पढ़ें- डॉ राजेंद्र प्रसाद का जीवन परिचय
यह भी पढ़ें- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का जीवन परिचय


लेख के बारे में-

इस आर्टिकल में आपने Sumitranandan Pant ka Jivan Parichay – सुमित्रानंदन पन्त का जीवन परिचय पढ़ा, हमे उमीद है यह की  जानकारी आपके लिए अवश्य फायदेमंद रही होगी और अगर आप किसी और महानुभव के बारे में पढना चाहते हैं तो ईमेल अथवा कमेंट करें |

Leave a Comment